Brief History of Surkanda Devi Temple – A Shakti Peetha

This mountain range is 9,995 feet above sea level and a Shakti Peetha. It is said that Kankhal near Haridwar Shree Sati saw the disrespect of her husband – Lord Shankar by her father Daksh Prajapati while Yagya was going on. She was angry thus, jumped into Yagya Kund to end her life. Lord Shankar carried the dead body of Sati started roaming all over the world and reached this location. This is the location where Sati’s head had fallen. That is why this mountain location is having immense importance.

It is said King of Swarg Lord Indra did prayers and meditation at this very location thus, it is also known as ‘Surkut.’

Ganga Dushhera, Navratri is the time of festivals at Surkanda Devi temple.

यह पर्वत श्रृंखला समुद्र तल से 9,995 फीट ऊंची है और एक शक्तिपीठ है। ऐसा कहा जाता है कि हरिद्वार के पास कनखल में यज्ञ के दौरान श्री सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति द्वारा अपने पति भगवान शंकर का अपमान देखा था। इस प्रकार वह क्रोधित होकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने के लिए यज्ञ कुंड में कूद गई। भगवान शंकर सती के मृत शरीर को लेकर पूरे विश्व में घूमने लगे और इस स्थान पर पहुंचे। यह वह स्थान है जहां सती का सिर गिरा था। इसीलिए इस पर्वतीय स्थान का अत्यधिक महत्व है।

ऐसा कहा जाता है कि स्वर्ग के राजा भगवान इंद्र ने इसी स्थान पर प्रार्थना और ध्यान किया था, इसलिए इसे ‘सुरकुट’ के नाम से भी जाना जाता है।

गंगा दशहरा, नवरात्रि सुरकंडा देवी मंदिर में त्योहारों का समय है।

(Source: Display Board)

(English to Hindi Translation by Google Translate)

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